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पार्टी और चाय में खर्च कर डाला मजदूर कल्याण बोर्ड में जमा हुए 20,000 करोड़ रुपये? सरकार के पास इसका कोई ?

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आप अपने आस-पास अक्सर निर्माण कार्य में लगे मजदूरों को देखते होगे! यदि आप सुबह जल्दी जागने वालो में से है तो यकीनन आप ने अपने घर के आस-पास चौराहे पे टोलियों मे बैठे मजदूरों को देखा होगा! ऐसे जगह को हम आम बोल चाल  की भाषा मे “लेबर चौक “ से संबोदित करते है! यहाँ मजदूर सुबह सात बजे तक खा-पी कर काम की तलाश में पहुच जाता है ! एक समय तक काम का इंतेजार करता है , यदि  काम मिल गया तो, खुश होकर काम पे चला जाता है अन्यथा मायूस होकर घर  को लौट जाता है! सरकारी आंकरे बताते है की हमारे देश मे कृषी के बाद सबसे जायदा लोग  निर्माण कार्यो  मे काम करते है ! निर्माण कार्य जैसे मकाने का निर्माण, पूल निर्माण , सड़क निर्माण जैसे कामो को इसमें सम्मिलित किया गया है !

यह जानकर आपको कोई हैरानी नहीं होगी की केवल  दिल्ली मे लगभग आठ लाख निर्माण मजदूर रहते है, जिनका रोजगार सिर्फ कंस्ट्रक्शन साईट पे मजदूरी का काम करना है! साल के कुछ महीने मकानों मे , सडको पे काम करते है और वापस घर को लौट जाते है! पर कई मजदूर ऐसे किस्मत वाले नहीं होते, खतरों के बीच काम करना बहुत बार उनके लिए जानलेवा साबित होता है! कई ऐसे सरकारी एवं गैर सरकारी रिपोर्ट्स है जैसे दिल्ली स्कूल ऑफ़ सोशल वर्क सोसाइटी की 2009 की रिपोर्ट एवं अर्जुन सेन गुप्ता समिति की रिपोर्ट जो निर्माण कार्य मे लगे मजदूरों की  व्यथा को बहुत ही विस्तार से हमारे सामने रखती है! अर्जुन सेन गुप्ता समिति की रिपोर्ट यह बताती है की 92% काम करने वाले लोग असंगठित छेत्र मे काम करते है और केवल 8% लोग ही संगठित छेत्र मे काम करते है ! यही 8 % संगठित छेत्र के लोगो को सामाजिक सुरक्षा से संबधित लाभ मिलते है ! कमिटी की रिपोर्ट यह भी कहती है की 76 % असंगठित छेत्र के मजदूर 20 रूपए प्रति दिन पे गुजर बसर कर रही है !

निर्माण कार्य मे लगे मजदूरों की ऐसी व्यथा के कारण ही कुछ लोग एवं संस्थाए आगे आकर इनके लिए कुछ करने की ठानी ! ऐसे ही कुछ लोग है न्याय मूर्ति वी .आर. कृष्ण अय्यर, आर . गीता जी, सूभाष भटनागर जी, आर . वेंकटरमणी एवं अन्य ! इनके प्रयाशो एवं लाखो मजदूरों की सालो के आन्दोलन के बाद भारत सरकार ने “भवन एवं अन्य संनिर्माण नियम 1996”  (The Building and Other Construction Workers Act)  एवं ”भवन एवं अन्य संनिर्माण सेस नियम 1996” (The Building and Other Construction Workers Cess Act) पारित करती है !  कानून के तहत हरेक राज्यों मे मजदूर कल्याण बोर्ड बनने की बात कही गयी ! यही मजदूर कल्याण बोर्ड अपने राज्यों मे हो रहे निर्माण कार्यो से 2 % से जायदा नहीं और 1 % से कम नहीं अधिकर के रूप मे निर्माण के कीमत का वसूल करगी और यही पैसा मजदूरों के सामाजिक एवं आर्धिक कल्याण मे लगाया जायेगा ! अगर देखा जाये तो कुछ राज्यों को छोर दे तो लगभग सभी राज्यों ने इसे अपने यहाँ लागू किया है !

“ केरल केवल अकेला राज्य है जिसने अपने मजदूर कल्याण बोर्ड मे जमा हुआ राशि का 94.51% मजदूरों के कल्याण मे खर्च किया! आंकरे बताते है की मार्च 31, 2016 तक मजदूर कल्याण बोर्ड मे 26000 करोड़ से ज्यादा की राशी जामा की गयी! जमा किये गये राशि मे से केवल 21 % यानी 5684 करोड़ राशि ही खर्च की गयी”

इनके कारणों को समझने के लिए जब न्यायलो मे अर्जी लगाई गयी तो ऐसे-ऐसे तथ्यों का पता चला जो और चौकाने वाले थे! एक ऐसी ही पी.आई .एल नेशनल कमिटी फॉर सेंट्रल लेजिस्लेशन के द्वारा दायर किया  गया! इसके जवाब मे सरकार एवं उसके एजेंसी यह कहती है की राज्यों के पास इसका कोई हिसाब ही नहीं है की मजदूरों के लिए जमा किया गया 20,000 करोड़ से जादा की राशी कहा गयी! हाल ही मे सर्वोच न्यालय मे सुनवाई के दौरान भारत सरकार को कई कठोर निर्देश दिए गये!

एक तरफ परिस्थीती यह है की निर्माण मजदूर हर रोज मर रहे है और गरीबी मे जीने के लिए मजबूर है और एक तरफ इतनी राशि सालो से खातो मे ऐसे ही पड़ी है! इसका कोई हिसाब सरकारों के पास नहीं है की पैसा कहा गया! क्या यह पैसा राजनीती पार्टियों द्वारा अन्य कामो मे लगाया गया, जैसा की दिल्ली  सरकार ने अपने यहाँ दिल्ली मजदूर कल्याण बोर्ड मे जमा हुए 1536 करोड़ मे से 900 करोड़ को अन्य कामो के लिए खर्च किया, पर सरकार यह भूल गयी की यह पैसा मजदूरों का है , उनके परिवार के भविष्य के लिए है, इस देश के भविष्य के लिए है, ना की सरकार मे बैठे असंवेदंसील राजनेता और बाबू लोगो की झूठे कामो के लिए है! निर्माण मजदूरों के एक अंधकार पूर्ण भविष्य मे यक़ीनन कल्याण बोर्ड की योजनाये कुछ रोशनी की किरण देती है , पर असंवेदंसील एवं भ्रष्ट सरकारे यह कतई नहीं देखना चाहती है की आम आदमी आगे बढे, उसके बच्चे पढ़े और देश को एक गौरव राष्ट के रूप मे पहचान मिले !

 

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(3) Comments

  1. 2018-04-25 15:13:49 ranjeet kumar

    very good

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