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क्यों करते हैं वे ऐसा?

person access_time26:05:2018 chat_bubble_outline(1) comments

बाबा, तेरी ऊँगली जो छुटी तो डर लगता हैं|

डर लगता हैं,

टॉफ़ी और जलेबी की अपनी लालच से,

नए नए बने uncle और उनकी चासनी बंध बातों से|

एसे में अगर, मेरी पसंद एक खौफ़ बन जाए,

तो इतना न सोचना, पर उनसे पूछना

क्यों करते हैं वे ऐसा?

माँ, मेरी आवाज़ नहीं आती क्या?

तेरे आंचल का अंबर नहीं हैं यहाँ,

न मेरी घुड़िया सिहराने रखी हैं|

इस घर कोई नहीं मुझे उस घर पहुँचाने को,

एसे में अगर, मैं अपना ही घर भूल जाऊं

तो इतना न सोचना, पर उनसे पूछना

क्यों करते हैं वे ऐसा?

उजाले में आँख नहीं खुलती,

अँधेरा चीख़ और दर्द को यार बनाए बैठा है|

कृष्ण भी अपनी कृष्णा(दौर्पदी) को भूल गए हैं शायद,

जो आज हर घर में रावण राम बना बैठा है|

एसे में अगर, कुछ मंदिर और मस्जिद विरान हो जाएँ,

तो इतना न सोचना, पर उनसे पूछना

क्यों करते हैं वे ऐसा?

उन भेड़ियों ने नोचा है

मुझे, मेरी रूह को

अपने पंजों तले रौंदा हैं|

इंसानों की आदालत में खड़े तुम,

उन कुत्तों का मज़हब पूछते हो,

एसे में अगर, एक धर्मं इंसानियत भी खत्म हो जाए,

तो इतना न सोचना, पर उनसे पूछना

क्यों करते हैं वे ऐसा?

इंसाफ़, हक़ीकत में होता है क्या?

अब फ़र्क नहीं पड़ता|

इज्ज़त की कफ़न अगर मिलती हो

तो ओढ़ा देना|

आने वाले वक़्त में कुछ ऐसा करना,

मेरी बहनों को बचा लेना|

एसे में अगर, तुम मुझे भूल जाओ,

तो इतना न सोचना, पर उनसे पूछना

क्यों करते हैं वे ऐसा?

(लेखक: Diksha Gupta )

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(1) Comments

  1. 2018-05-27 08:54:35 Neha

    Wow.. Great work Diksha :)

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