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जे पी के नाम पत्र

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सेवा में,

लोकनायक जय प्रकाश नारायण,

स्वर्ग लोक, आसमान

 

द्वारा : नारदमुनि, स्वर्गलोक डाक सेवा, इन्द्रपुरी.

विषय: बिहार आगमन के सन्दर्भ में.

 

माननीय  महोदय ,

क्षमा कीजियेगा अगर यह संबोधन उचित न हुआ तो क्योंकि मैं आपके चेलों के तरह न ही लच्छेदार भाषण जानता हूँ ना ही उतनी अच्छी भाषाई पकड़ है. ये अलग बात है कि ये भी आपके चेलों के मेहरबानी से ही है, क्योंकि जब इस प्रदेश की बागडोर आपके चेलों के हाथ में आई (आपकी मेहरबानी से या आपके गलत निर्णय से या इन्होने आपको धोखा दिया ये तो आप ही बेहतर बता सकते हैं) इन्होने सबसे पहले सरकारी शिक्षा व्यवस्था को ध्वस्त किया ताकि गरीब गुरबों के बच्चे पढ़ ना सके. अब तो बच्चों को कुल प्राप्तांक 50 के पेपर में 60 अंक आते हैं ... गुरूजी गाय, बकरी गिनते हैं और चुनाव करवाते हैं और बच्चे खिचड़ी खाकर घर चले जाते हैं ... आपको बताऊँ कि आपके चेले बहुत चालू हो गए हैं इन्होने एक तीर से दो निशाने लगाये हैं पहली की राज्य में निजी शिक्षा का जबरदस्त धंधा जमाया है जिसका लाभ इन्हें भी मिलता है, और दूसरी की जब अच्छी शिक्षा व्यवस्था नहीं होगी तो गरीब लोग पढ़ लिखकर अपना हक़ नहीं मांगेगे और इनके पीछे जिंदाबाद-मुर्दाबाद करेंगे. ये मत समझिएगा कि मैं आन्दोलन या मुद्दा आधारित संघर्ष के विरुद्ध हूँ लेकिन जिस प्रकार का संघर्ष इन्होने कायम किया हुआ है उसके पीछे जिन्दाबाद-मुर्दाबाद तो कोई भी पढ़ा-लिखा सजग इन्सान नहीं करेगा.

अब आप परेशान हो रहे होंगे कि अभी ये सब आपको क्यों बता रहा हूँ ... ऐसा है कि जो स्वर्ग सिधार जाते हैं (जैसा मुझे लगता है कि आप अपने अच्छे कर्मों से वहीं गए होंगे) उन्हें दो ही दिन याद किया जाता है एक जन्मदिन के दिन दूसरा मरन दिन के दिन.. खैर ये परंपरा तो राजनीति की है और मैं न कोई राजनेता हूँ न ही आपका चेला... आगे जो बताने जा रहा हूँ यह मान कर ही बताऊंगा कि अभी तक आपको अपने चेलों से भेट नहीं हुई होगी (क्योंकि आपके बाद उन्होंने जो किया उसके बाद आप जहाँ हैं वहां तो वे जा नहीं सकते हां विपरित वाले मकान में होंगे) नतीजतन आपको यहां की खबर नहीं होगी. आप सोंच भी रहे होंगे कि  मेरे जाने के बाद क्या हुआ सो मैंने आपको खबर करने का बीड़ा उठाया है ... हाँ एक बात तो बताना हीं  भूल गया कि अभी क्यों जबकि न आपके स्वर्ग सिधारने का दिवस है न ही जन्मदिन ... मुझे लगता है कि आपको याद होगा कि  5 जून 1974 को आपने सम्पूर्ण क्रांति का नारा दिया था गाँधी मैदान में और अभी जून का महिना है ... अब आपके चेले ने तो इस दिवस का कुछ किया नहीं भले सीता नवमी को सरकारी छुट्टी बना दिया.... मेरे लिए तो पूरा महिना समपूर्ण क्रांति का है तो इस महीने थोड़ा ज्यादा एक्टिव हो गया हूँ (लिखने लगा हूँ ब्लॉग और फेसबुक पर) सो सोंचा कि आपको एक पत्र लिख दूँ ...

अब आपके चेलों (प्रचंड चेलों की बात करूँगा) की बात बताता हूँ ... एक जो था मचंड उसको सबसे पहले सत्ता मिली और सबसे पहले उसने आपके आदर्शों को शीशा वाला बोइयाम में बंद करके ताख पर रख दिया और जनता को इतना परेशान किया कि उसको जंगल राज कहा जाता है ... अब ये अलग बात है कि जंगल में भी इतना ज्यादा अंधेरगर्दी होता है कि नहीं ये तो जंगल का जानवर सब ही बताएगा और उससे बात करने का भाषा हमको आती नहीं ... तो जब आपका इ समूह वाला चेला सब आपके पास या आपके सामने वाला मकान में जायेगा, तो ओकरे जंगल में भेजिएगा जानवर सब से बात करने... आपके इ चेलवा का एगो खूबी है इ धर्मनिरपेक्षता का पोषक है लेकिन ज्यादा मुस्कुराइए मत कि आपके सिद्धतांत को मानता है .. इ सब खाली वोट के खेला है ... अभी फुलवारी में जब झड़प हो गया तब उसमे दुनो एकर वोटर था ... एही डरे कौनो नहीं गया ... खैर ये निर्णय आपही ले लीजिये.. 

इसके उपरांत आपके दुसरे चेला का नंबर आता है ... जनता इतनी दुखी थी कि आपके इस चेले में लोगों को आशा दिखी कि कुछ बदलेगा ... और कुछ बदलाव हुआ भी कम से कम अब आप बिहार आयेंगे तो सड़क मार्ग से अपने सभी आन्दोलनकारियों से मिलने जा सकेंगे बस गाड़ी बड़ा रखना होगा... वो क्या है कि सबको आदत थी कच्ची सड़क या टूटे हुए सड़क के किनारे रहने का... अब सड़क बन गया तो गाड़ी तेज चलती है और सबको डर लगता है ... सब अपने अपने घर के सामने इतना ऊँचा-ऊँचा ब्रेकर बना दिया है ... ब्रेकर तो अब समाज में हर दबंग (बेवकूफ) के घर के सामने बन गया है... खैर आपके इस चेले की सबसे बड़ी खूबी है बंदी (प्रतिबन्ध, निषेध) ... इन्होने ढेर सारी बंदी की है ... शराब बंदी, दहेज़ बंदी, बाल विवाह बंदी अब खैनी बंदी भी होने वाला है .... अब आपके इस चेले को बंदी ही हर समस्या का समाधान लगता है ... हो सकता है कि आने वाले समय में जनसँख्या नियंत्रण के लिए विवाह की बंदी भी कर सकता है...

आपके चेलों का तीसरा समूह जो है; वो अभी और पहले भी शासन में तो रहा लेकिन दूसरे चेले के साथ ही रहा... ये हिन्दुओं को मुसलमानों से लड़ाते हैं ताकि इनकी राजनीति हिंदुत्व के मुद्दे पर चलती रहे और आपके पहले समूह के चेले की राजनीति मुसलमानों को बचाने के दम पर चलती रहे... आपके चेलों के इस समूह में तो कई ऐसे लोग हैं जो केंद्र के जनसंघ (अब उसे भाजपा कहते हैं ये जानकारी तो आपको है ही फिर भी लिख दिया ताकि सनद रहे) सरकार में मंत्री हैं और एक जो है (जिसको आपने स्टीयरिंग कमिटी में रखा था ) वो लोगों को ये समझाने की कोशिश कर रहा है कि अभी जो संविधान है वो डुप्लीकेट है और ओरिजिनल वाला उसके पास है ... वो संविधान बदलने की कवायद कर रहा है ... मैं तो उस समय था नहीं आप ही थे तो आप ही बेहतर बता सकते हैं कि ओरिजिनल वाला कौन है ...

आपके चेलों का एक और समूह है जो सीधे तौर पर इन तीनों के साथ तो नहीं है पर इनका पक्षसमर्थन करता है और आपके सिद्धांत के बारे में कम से कम बात तो करता ही है.... इसमें से ज्यादा लोग राजधानी की विभिन्न वातानुकूलित कमरे में संघर्ष और 74 की बात करते मिल जायेंगे ... कुछ हैं जो कोशिश में लगे हैं आपके दिशानिर्देशों के अनुसार लेकिन किसी भी नये विकल्प के विरुद्ध हैं और ज्यादातर अप्रत्यक्ष रूप से तीनों में से किसी न किसी का समर्थन करते रहते हैं.... अब इनका बूढ़ा तन और मन कोई बदलाव नहीं ला सकता ... इनमे आप वाली बात नहीं है... अब आपको ही आना पड़ेगा ...

अंत में आपसे निवेदन है कि आप आइये हम सब आपके साथ खड़े होने को तैयार हैं ... एक बात लेकिन बता दे रहा हूँ कि नये लोगों के नेतृत्व के लिए आपको अपने मन और तन को तैयार करना होगा ... अपने पूर्व के चेलों के भरोसे मत आइयेगा नहीं तो जिनको आपने प्रधानमंत्री बनाया था उन्होंने जो टका सा जवाब आपको दिया था वही इनसबसे आपको मिलेगा ...

विश्वासभाजन,

रणविजय कुमार 
एक पीड़ित और आशान्वित बिहारी  

(He is an activist, based in Patna, to read more his writing visit his personal blog https://ranvijayblog.blogspot.com/ )

Pics Credit: The Indian Express

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